सफल होने के लिये ना बोले, ना कहने के फायदे

हमेशा ‘हां’ कह कर अपनी खुशियों का गला न घोंटें ! कई लोग ‘ना’ कह नहीं पाते. यह बहुत बड़ी समस्या है .इसे कमजोरी कहना ज्यादा उचित होगा. हम लोगों के काम करते जाते हैं,उनकी बाते मानते जाते हैं,
हम अपनी खुशियों का गला घोंटतेजाते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि हमें ‘ना’ कहना नहीं आता. यह शब्द हम इसलिए नहीं बोल पाते, क्योंकि हम बदले में लोगों का प्यार चाहते हैं, उनकी तारीफ चाहते हैं.हम चाहते हैं कि लोग हमें अपनाएं. इन चीजों के लालच में हम खुद के साथ अन्याय करते रहते हैं और
सहनशक्ति की सीमा तक वो सारे काम करते हैं,जो हमें तकलीफ पहुंचाते हैं, हमें नाखुश करते हैं.हम यह काम सालों-साल करते हैं. जब लोग हरचीज में हमारी ‘हां’ सुनते हैं, तो बदले में हमे विनम्र, अच्छा, मददगार इनसान आदि नामों का ताज पहनाते हैं.
लेकिन यदि हमारी सहनशक्ति 10 साल बाद टूटजाती है और हम 11वें साल में किसी काम को लेकर ‘ना’ कह देते हैं, तो वही लोग हमेंअभिमानी, अहंकारी, बदतमीज कह देते हैं. वे हमारी 10 साल की मेहनत, त्याग, सेवा को तुरंत भूल जाते हैं. तब हमें लगता है कि काश उसी वकत ‘ना’ बोल दिया होता.
मेरा कहना यह नहीं है कि आप हर चीज में ‘ना’ बोलना शुरू कर दें. कहना सिर्फ इतना है कि खुद से सवाल करें कि आपके लिए लोगों का प्यार,तारीफ ज्यादा मायने रखता है या आपकी खुद की खुशी, दिमाग की शांति? यदि आप किसी काम को करने से नाखुश हैं, तनाव में हैं,तो बेहतर है कि आप ‘ना’ कह दें.यह न सोचें कि सामने वाला नाराज हो जायेगा, प्यार नहीं करेगा, फिर वह मुझ से ठीक से बात नहीं करेगा.
याद रखें,लोगों को आप हमेशा खुश नहीं रख सकते हैं. आप हमेशा उनके मुताबिक नहीं चल सकते. यदि आप ऐसा करने की कोशिश करेंगे, तो कहीं न कहीं खुद के साथ अन्याय करेंगे.दोस्तो,
हम उन लोगों के नाराज होने से क्यों डरें, जिनकी राय पल भर में हमारे प्रति बदल जाती है. जो कल हमें विनम्र, प्यारा,अच्छा इनसान कह रहे थे, वह हमें अचानक अभिमानी, गुस्सैल, अहंकारी कहने लगे. आप केवल उन्हें ही अपना मानें, जो आपके ‘ना’ कहने के बावजूद भी आपसे प्यार करें. आपकी ‘ना’ कहनेकी वजह को समझे
- बात पते की
* यदि कोई इनसान पहले आप की हर बात पर ‘हां’कहता था, लेकिन आज अचानक उसने ‘ना’ कह दिया, तो उस इनसान की परिस्थिति को समझें
.* दूसरों से प्यार, सम्मान पाने के लिए अपनी खुशियों का गला न घोंटें,
क्योंकि येछोटे-छोटे त्याग किसी दिन ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ेंगे.



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