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हिलेरी क्लिंटन की जीवनी | Hillary Clinton Biography In Hindi

नाम – हिलैरी डियान रोधम क्लिंटन (Hillary Clinton) जन्म – 26 अक्टूबर 1947 राष्ट्रीयता – अमेरिकन उपलब्धि – अमेरिका के भावी प्रेसीडेंट, अमेरिका के 42वे राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हैं, हिले...

भगवान गणेश

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एक बार भगवान गणेश बालक बन गए। उसके एक हाथ में चम्मच भर दूध था और दूसरी हथेली में एक चावल। घर-घर जाता और कहता ‘मेरे लिए खीर बना दो’। चम्मच भर दूध और एक चावल देख कर घर की औरतों की हंसी नही रुकती। वे कहती इतने में क्या खीर बनेगी? बालक ज्यादा हठ करता तो कोईफुसला कर टाल देती तो कोई क्रोधित होकर उसे घर से निकाल देती। सुबहसे शाम होगई,बालक के लिए खीर बनाने को कोई तैयार नहीहुआ। सांझ पड़े बालक बने गणेश एक कुटिया मे पहुंचे, जहां एक वृद्ध महिला रहती थी। बालक ने वृद्धा से भी यही विनती करते हुए कहा, ‘मां मेरे लिए खीर बना दो, महल-भवन घूम आया, मेरे पास चावल भी है और दूध भी, पता नही खीर बनाने में कितनी मेहनत लगती है कि सामान देने के बाद भी कोई नहीं बनाता।’ वृद्ध महिला ने बालक को प्यार से पुचकारते हुए कहा,‘अरे मेरे लाडले! ला मैं बना देती हूं तेरे लिए खीर।’ वृद्द महिलाने अपनी बहू से कहा ‘छोटी कड़ाही लाना, मैं इस बालक के लिए खीर बना दूं।’ बालक ने अब एकनई अनूठी जिद बांध ली कि‘घर में जो सबसे बडी कड़ाही हो, खीर उसी में बनाओ। वृद्धा ने यह जिद भी मानी और सबसे बडे कड़ाही मे खीर बनाने की त...

एक दिल को छू लेने वाली सच्ची कहानी-

 एक दुकान में खरीददारी कर रहा था, तभी मैंने उस दुकान के कैशियर को एक ५-६ साल के लड़के से बात करते हुए देखा | कैशियर बोला:"माफ़ करना बेटा, लेकिन इस गुड़िया को खरीदने के लिए तुम्हारे पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं|"फिर उस छोटे-से लड़के ने मेरी ओर मुड़ कर मुझसे पूछा''अंकल, क्या आपको भी यही लगता है कि मेरे पास पूरे पैसे नहीं हैं?''मैंने उसके पैसे गिने और उससे कहा:"हाँ बेटे, यह सच है कि तुम्हारे पास इस गुड़िया को खरीदने के लिए पूरे पैसे नहीं हैं"| वह नन्हा- सा लड़का अभी भी अपने हाथों में गुड़िया थामे हुए खड़ा था | मुझसे रहा नहीं गया | इसके बाद मैंने उसके पास जाकर उससे पूछा कि यह गुड़िया वह किसे देना चाहता है? इस पर उसने उत्तर दिया कि यह वो गुड़िया है - जो उसकी बहन को बहुत प्यारी है | और वह इसे, उसके जन्मदिन के लिए उपहार में देना चाहता है |"यह गुड़िया पहले मुझे मेरी मम्मी को देना है, जो कि बाद में जाकर मेरी बहन को दे देंगी"| यह कहते-कहते उसकी आँखें नम हो आईं थीं | "मेरी बहन भगवान के घर गयी है...और मेरे पापा कहते है...

गाँव का सरपंच

एक बार मुझे मेरे गाँव का सरपंच बना दिया गया.. गाँव वालो ने सोचा की छोरा पड़ा लिखा है..समझदार है, अगर ये सरपंच बन गया तो गाँव की भलाई के लिए काम करेगा.. मौसम बदला, सर्दियों के आने के महीने भर पहले गाँव वालो ने मुझसे पूछा की - सरपंच साहब इस बार सर्दी कितनी तेज पड़ेगी.. मैंने गाँव वालों से कहा की मैं आपको कल बताऊंगा.. मैं तुरंत ही शहर की और निकल गया..वहा जाकर मौसम विभाग में पता किया तो मौसम विभाग वाले बोले - की सरपंच साहब इस बार बहुत तेज सर्दी पड़ने वाली है.. मैंने भी दुसरे दिन गाँव में आकर ऐसा ही बोल दिया.. गाँव वालो को विश्वास था की अपने सरपंच साहब पढ़े लिखे हैं..शहर से पता करके आये हैं तो सही कह रहे होंगे..गाँव वालो की नजर में मेरी इज्जत और बढ़ गयी.. तेज सर्दिया पड़ने की बात सुनकर गाँव वालो ने सर्दी से बचने के लिए लकडिया इक्कठी करनी शुरू कर दी. महीने भर बाद जब सर्दियों का कोई नामोनिशान नहीं दिखा तो गाँव वालो ने मुझसे फिर पूछा..मैंने उन्हें फिर दुसरे दिन के लिए टाला..और शहर के मौसम विभाग में पहुँच गया.. मौसम विभाग वाले बोले की सरपंच साहब आप चिंता मत करो इस बार सर्दियों ...

कहानी : एक बलात्कारी की आत्म-कथा Story In Hindi, Hindi Kahani

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तमाम सबूतों और गवाहों के बयानात के मद्देनजर अब जबकि मुझे सुप्रीम कोर्ट द्वारा सज़ा-ए-मौत का फरमान जारी किया जा चुका है और मैं भी यह मान चुका हूँ कि राष्ट्रपति द्वारा भी मेरी माफी की अपील हमेशाकी तरह देर सवेर अवश्यमेव ठुकरा हीदी जाएगी तो मैं अपनी मर्दानगी या मासूमियत दिखाने के लिए यह बिलकुल भी नहीं कहूँगा कि मुझे कोई अफसोस नहीं है और न यह सफ़ेद झूठ कि मैं बेगुनाह हूँ । जी हाँ मैं हूँ कुसूरवार और शत-प्रतिशत हकदार भी इसी सज़ा का हूँ बल्कि इससे भी यदि कोई बड़ी और भयानक सज़ा होती हो तो उसका .......किन्तु आज से लेकर खुद को फाँसी के फंदे पर लटकाए जाने तक मैं जो कुछ भी आत्मकथा स्वरूप लिख रहा हूँ वह किसी के भी दिल में अपनेप्रति सहानुभूति जाग्रत करने अथवापश्चात्ताप के रूप में न पढ़ा जायेऔर न ही माफीनामा समझा जाये......किन्तु एक बात तय है कि यह जो कुछ भी अपने अंतिम दिनों में व्यक्त करने चला हूँ आप यकीन जाननाकि हर्फ़-दर-हर्फ़ सच है और सच के सिवा कुछ भी नहीं .....और आप खुद ही सोचना कि अब आपमें करुणा जगाकर भी क्या मुझे माफी मिल सकती है ; अथवा मेरी बदनामी शोहरत में बादल जाएगी ?..........नहीं न........

मोका moka

एक बार एक कलाकार ने अपने चित्रों  की प्रदर्शनी लगाई।उसे देखने के लिए  नगर से सैकड़ो धनी -मानी व्यक्ति पहुंचे।एक लड़की भी उस प्रदर्शनी को देखने आई।उस ने देखा सभी चित्रों के अंत में एक ऐसे मनुष्य  का चित्र भी टंगा हैं, जिसके मुंह को बालो से ढंक दिया गया हैं  और जिसके पैरो पर पंख लगे थे।चित्र के नीचे बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था ‘अवसर ‘. चित्र कुछ भद्दा सा था इसलिए लोग उसपे उपेक्षित सी दृष्टि डालते और आगे बढ़ जाते।लड़की का ध्यान शुरू से ही इस चित्र पर था।जब वो उसके पास पहुंची तो चुपचाप बेठे कलाकार से पुछ ही लिया, श्रीमान जी यह चित्र किसका हैं? आपने इसका मुंह क्यों ढक के रखा हैं तथा उसके पैरो का क्या रहस्य हैं? कलाकार ने  दिया , ‘बेटी यह ‘अवसर’ का चित्र हैं।चूँकि साधारण व्यक्ति इसे पहचान नहीं पाते।अतः मैंने इसका मुंह ढंक रखा हैं , ताकि इसे देखकर जिज्ञासा तो उठे।पैरो में पंख इसलिए की यह अवसर  जो आज चला गया,कल फिर आएगा नहीं।इसलिए इसे उड़ने  से पहले ही थाम लो।इसका सदुपयोग कर लो।’ लड़की ने उसकी बात ...

जीत आपकी होगी jeet apki hogi

आप सोच रहे है की आप जो कर रहे है वो कठिन है, या फिर आपको ये एहसास हो रहा होगा की आपके लिए लक्ष्य तक पहुच पाना कितना कठिन होता जा रहा है. आप दिन रात कोशिश कर रहे है, अपना पसीना बहा रहे है. फिर भी जो आप चाहते है वैसे results आपको प्राप्त नहीं हो रहे है. और इसके साथ ही लोग आपको पीछे से taunt करते जा रहे है की “भाई तुमसे न होगा”. लोग आपको पीछे धकेलने का काम कर रहे है. वो आप पर हंस रहे है. यहाँ तक की आपके घर वाले भी आपके decision पर अफ़सोस जाता रहे है. और आपको कह रहे है की कुछ और try करो, “इसमें कुछ नहीं होगा.” आप एक बार fail होते है. दो बार fail होते है. तीन बार fail होते है. और ये सिलसिला चलता रहता है. और आप सोचते है की अब मैं क्या करूँ? क्या इसे बिच में ही छोड़ कर दूसरा कोई कार्य शुरू करूँ? या फिर इसमें ही एक आखरी बार अपना सारा दम लगा दूँ? आप अपने आप से कहते है. की एक आखरी बार और कोशिश करता हूँ. और इस बार आप जीतेंगे. आप इस बार इस race की finish line cross करेंगे.पर फिर भी कुछ लोग फिर से हार जायेंगे                       ...

कहानी : प्रेरणा , Kahani Prairna , Hindi Story

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वह  लड़की कभी भी मेरी मोहब्बत की तलबगार न थी क्योंकि न तो मैं खूबसूरत ही था और न ही कोई अमीरजादा। एक मामूली नौकरी करने उसके शहर में आया था। मेरे मकान मालिक की इकलौती व अत्यंत खूबसूरत लाड़ली बेटी थी वह। मैं चौबीस का था और वह उन्नीस बीस के लगभग। प्रारंभ से ही सहशिक्षा काल के दौरान मेरा अनेक लड़कियों से परिचय हुआ  , दोस्ती भी खूब हुई किन्तु मेरी बदसूरती और काली कलूटी रंगत ने मेरी मोहब्बत की लालसा को कभी पूरा न होने दिया। जिससे भी प्रेमाग्रह किया उसी ने आइना दिखाकर मेरी हँसी उड़कर रख दी और अंततः शनैः शनैः मोहब्बत और शादी के ख़याल दिल ही दिल में दम तोड़ने लगे। अपने प्रेम निवेदनो को जिस तिस के द्वारा ठुकराए जाने के बावजूद भी कभी भी मुझमें कुछ कर गुजरने की प्रेरणा जाग्रत नहीं हुई। मैं चाहता था कोई तो कहे  '' कुछ करके दिखाओ ''  पर कभी ऐसा न हुआ ...और जैसे तैसे एम. ए. करके यहाँ नौकरी पर आ गया। पहली ही बार उस सुंदरी को देखकर मोहब्बत प्राप्ति के मरे हुए विश्वास पुनः जीवित हो उठे फ़िर भी पिछली घटनाओं ने मेरे प्रेम निवेदन की हिम्मत पस्त कर रखी थी इसलिए यूँ ही एक ...