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कैसे बने मेमोरी के मास्टर

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इसे कहीं देखा तो है, पर नाम याद नहीं आ रहा! अरे, मोबाइल कहां रख दिया,  याद नहीं आ रहा! मेमरी बेकार हो गई है...  ऐसी बातें बोलते हुए आपने अक्सर लोगों को सुना होगा।  इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें कोई मेमरी प्रॉब्लम है। दरअसल, फोकस न होने और ध्यान कहीं और होने की वजह से ऐसा होता है।  आप चाहें तो अपनी मेमरी को और निखार सकते हैं। कैसे,  एक्सपर्ट्स की मदद से बता रही हैं प्रियंका सिंह: अक्सर लोगों को लगता है कि हम भूल रहे हैं,  लेकिन असल में यह मेमरी लॉस नहीं होता।  इसकी वजह अब्सेंट-माइंडेडनेस (दिमाग का वहां न होना)  और एंग्जाइटी (बेचैनी या उतावलापन) होता है।  मेमरी का फंडा है रेकॉर्ड, स्टोर और फिर री-प्ले। अगर रेकॉर्ड ही नहीं हुआ, तो री-प्ले कैसे होगा।  इसलिए अगर किसी चीज को याद रखना चाहते हैं  तो सबसे पहले उस पर पूरा ध्यान लगाएं,  गौर से सुनें-देखें और फिर दिमाग में बिठाएं।  फिर वह आपके दिमाग से निकलेगी नहीं। ऐसे करें मेमरी तेज 1. दिमागी तौर पर ऐक्टिव रहें शरीर को फिट रखने के लिए जिस तरह फिजिकल ...

भारत के बारह राष्ट्रपती

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                                                                                                                                                                                                                                                                                             ...

सुकरात और आइना Sukrat aur Aaina

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वास्तविक सौन्दर्य हर सुबह घर से निकलने के पहले सुकरात आईने के सामने खड़े होकर खुद को कुछ देर तक तल्लीनता से निहारते थे एक दिन उनके एक शिष्य ने उन्हें ऐसा करते देखा. आईने में खुद की छवि को निहारते सुकरात को देख उसके चहरे पर बरबस ही मुस्कान तैर गई. सुकरात उसकी और मुड़े और बोले, " बेशक तुम यही सोचकर मुस्कुरा रहे हो न की यह कुरूप बूढा आईने में खुद को इतनी बारीकी से क्योंदेखता है? और पता है मैं ऐसा हर दिन हीकरता हूँ." शिष्य यह सुनकर लज्जित हो गया और सर झुकाकर खडा रहा. इससे पहले की वह माफी मांगता, सुकरात ने कहा, " आईने में हर दिन अपनी छवि देखने पर मैं अपनी कुरूपता के प्रति सजग हो जाता हूँ. इससे मुझे ऐसा जीवन जीने के लिए प्रेरणा मिलाती है जिसमें मेरे सद्गुण इतने निखरे और दमकें की उनके आगे मेरे मुखमंडल की कुरूपता फिकी पड जाये शिष्य ने कहा, "तो क्या इसका अर्थ यह है की सुन्दर व्यक्तियों को आइने में अपनी छवि नहीं देखनी चाहिए/" "ऐसा नहीं है" सुकरात ने कहा, "जब वे स्वयं को आईने में देखें तो यह अनुभव करें की उनके विचार , वाणी और क...

महावीर स्वामी के लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र:

मानव जीवन को सरल और महान बनाने के लिए महावीर स्वामी ने कई अमूल्य शिक्षाएं दी हैं। जिनमें सत्य को अपनाना,अहिंसा, अपरिहर्य, क्षमा, दया, करुणा, ब्रह्मचर्य, अधर्म को त्यागना शामिल है। उन्होंने त्याग, संयम, प्रेम, करुणा, शील, सदाचार कापवित्र संदेश फैलाया। भगवानमहावीर ने चतुर्विध संघ की स्थापना की। महावीर स्वामी की शिक्षाएं:                                                                                                                                                               (1)सत्य:---सत्य ही सच्चा तत्व है। वह बुद्धिमान प्राणी है जो सत्य को अपनाता है। सत्य का साथ देने से ही मनुष्य मृत्यु को तैरकर ...

दुनियादारी निभाते एक आम आदमी संत कैसे बना ?

संत तुकाराम केवल वारकरी संप्रदाय के ही शिखर नहीं वरन दुनिया भर के साहित्य में भी उनकी जगह असाधारण है। उनके अभंग अंगरेजी भाषा में भी अनुवादित हुए हैं। उनका काव्य और साहित्य रत्नों का खजाना है। यही वजह है कि आज सैकड़ों वर्षों बाद भी वे आम आदमी के मन में सीधे उतरते हैं। दुनियादारी निभाते एक आम आदमी संत कैसे बना, साथ ही किसी भी जाति या धर्म में जन्म लेकर उत्कट भक्ति और सदाचार के बल पर आत्मविकास साधा जा सकता है। यह विश्वास आम इंसान के मन मेंनिर्माण करने वाले थे संत तुकाराम यानी तुकोबा।                                                                                                                                                   ...

कबीर जी ... संत महापुरुष

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कबीर भारतीय मनीषा के प्रथम विद्रोही संत हैं, उनका विद्रोह अंधविश्वास और अंधश्रद्धा के विरोध में सदैव मुखर रहा है। महात्मा कबीर के प्राकट्यकाल में समाज ऐसे चौराहे पर खड़ा था, जहां चारों ओर धार्मिक पाखंड, जात-पात, छुआछूत, अंधश्रद्धा से भरे कर्मकांड, मौलवी, मुल्ला तथा पंडित-पुरोहितों का ढोंग और सांप्रदायिक उन्माद चरम पर था। आम जनता धर्म के नाम पर दिग्भ्रमित थी। मध्यकाल जो कबीर की चेतना का प्राकट्यकाल है, पूरी तरह सभी प्रकार की संकीर्णताओं से आक्रांत था। धर्म के स्वच्छ और निर्मल आकाश में ढोंग-पाखंड, हिंसा तथा अधर्म व अन्याय के बादल छाएहुए थे। उसी काल में अंधविश्वास तथा अंधश्रद्धा के कुहासों को चीर कर कबीर रूपी दहकते सूर्य का प्राकट्य भारतीय क्षितिज में हुआ। वैसे संत कबीर के कोई जीवन वृत्तांत का पता नहीं चलता परंतु, विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर साहेब का जन्म विक्रम संवत 1455 तथा मृत्यु विक्रम संवत 1575 माना जाता है। जिस तरह मातासीता के जन्म का पता नहीं चलता, उसी तरह कबीर के जन्मका भी रहस्य आज भी भारतीय लोकमानस में जीवंत है। कबीर बीच बाजार और चौराहे के संत हैं। वे आम जनता से अपनी बात प...

महाप्रज्ञजी-- संत महापुरुष

अपने आचार, विचार एवं व्यवहार की श्रेष्ठता शिखर-सी ऊंचाई एवं समुद्र-सी गहराई लिए तेरापंथ धर्मसंघ के अनेकांत को जीवन में धारण करने वाले यशस्वी, तेजस्वी अनुशासित जीवन के पक्षधर आचार्य महाप्रज्ञजी का जीवन अलौकिक शक्ति का प्रतिबिंबथा। जो भी उनके सान्निध्य में आया उसने अपने को धन्य समझा। महाप्रज्ञजी को आचार्य तुलसी का स्नेह एवं अपनत्व मिला एवं उनकी निश्रा में मुनिवृत के पालन की जो सीख मिली उसे अंगीकार कर सारे विश्व में एक नए समाज के निर्माण की नींव रखी। जीवन में आगे बढ़ने की उनकी सोच सभी सामाजिक-धार्मिक संकीर्णताओं को पीछे छोड़ देती है। ऐसे आचार्यश्री का हमारे बीच न रहना सिर्फ तेरापंथ संघ का ही नहीं वरनसारे विश्व में एक चिंतक, विचारक एवं सुधारक की क्षति हुई है।                                                                                               ...

श्री ए पी जे अब्दुल कलाम ने अपने सहायक वैज्ञानिक को उसकी पत्नी की डांट खाने से कैसे बचाया

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थुम्बा में रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन पर वैज्ञानिक एक दिन में लगभग12 से 18 घंटे के लिए काम करते थे. इस परियोजना पर काम कर रहे वैज्ञानिकों किसंख्या सत्तर के लगभग थी . सभी वैज्ञानिक वास्तव में काम के दबाव और अपने मालिक की मांग के कारण निराश थे, लेकिन हर कोई उससे वफादार था और नौकरीछोड़ने के बारेमें नहीं सोचता था .                                                                                                                                                                                                     ...